Short Stories

अजातशत्रु कुणिक

मेरे दो छोटे भाई हल्ल और विहल्ल। पिताश्री ने उनके हिस्से मे दिव्य हार एवं दो कुन्डल दिए थें। मेरी पटरानी पद्मावती ने उन चीजों का लाने के लिए हठ की। हल्ल, विहल्ल को जब इस बात का पता चला तो दोनों अपने नाना चेड़ा राजा की शरण में पहुंच गए। पत्नी की हठ पूरी करने के लिए मातामह चेड़ा के साथ युद्ध छेड़ना पड़ा। शास्त्रों के पन्ने पर प्रथम नम्बर गिने जाने वाले उस महा-भयंकर युद्ध में एक करोड़ अस्सी लाख मनुष्यों की जाने गई। पशुओं की तो कोई गिनती ही नहीं। जिसमें से सिर्फ दो मनुष्य ही सद्गति को प्राप्त हुए। बाकी सब दुर्गति की खाई में गिर गए। एक छोटी सी स्त्री की ख्वाहिश के खातिर।

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