Short Stories

अहिंसा जो हृदय से फूट पड़ी

दीवान अमरचन्द जी दानी और परोपकारी तो थे ही, किन्तु सच्चे अर्थो में अहिंसक और जैन थे। एक बार महाराज जयपुर ने इनकी परीक्षा के लिये दीवान साहब से कहा-दीवान जी! मैं तो कुछ दिन को बाहर जा रहा हूँ, अतः इन दिनों में इस सिंह को आपकी जिम्मेवारी पर छोड़ जा रहा हूँ, इसकी देखभाल तथा खाने पीने की व्यवस्था ध्यान पूर्वक अच्छी रखें, किसी भी तरह सिंह दुखी न होने पावे। दीवान सा॰ ने आनाकानी की। राजा को तो इनके जैनत्व की परीक्षा करनी थी। अतः अत्यन्त आग्रह पूर्वक उसके खाने-पीने का भार इन्हीं के ऊपर छोड़ गयें। दीवान सा॰ ने दूसरे ही दिन दूध और अन्नाहार सिंह के सामने रख दिया, किन्तु मांस भक्षी शेर ने उसकी तरफ देखा भी नहीं। अनेक प्रयत्न करके दीवान सा॰ सफल नहीं हुए, तब वापस चले आये। दूसरे दिन फिर वही दूध और रोटियां लेकर सिंह के सामने पहुँचे। आज सिंह दो दिन का भूखा हो चुका था, इन्हें देखकर जोर जोर से दहाड़ मारने लगा। अनेक प्रयत्न करने पर भी मांसाहारी सिंह अन्नाहार की तरफ देखकर दहाड़ता रहा, किन्तु उसने कुछ भी नहीं खाया। यह देंखकर दीवान सा॰ बहुत परेशान और दुखी हुए। तथा राजा के कुपित होने की बात सोचकर तो सिंहर उठे। आखिर खेद खिन्न होकर वापस चले आये। तीसरे दिन फिर वही सामान लेकर सिंह के पिंजडे के पास गये। आज शेर तीन दिन का भूखा हो चुका था, भूखे आदमी को शेर की उपमा दी जाती है, लोग कहते हैं-भूखा आदमी शेर के बराबर होता है किन्तु आज तो सिंह ही तीन दिन का भूखा था। दीवान सा॰ ने पिंजड़े का मुंह खोला और सामान लेकर पिंजड़े के भीतर सिंह के सामने पहुंचे और शेर से कहा-’वनरा! यदि तुम्हें अपनी भूख ही मिटानी है तो ये भेाजन रखा हैं, इसे खाकर अपनी भूख मिटा सकते हो और यदि मांस ही खाना है तो लो यह मेरा शरीर खाकर अपनी भूख बुझालो।” इतना कहकर आप स्वयं उस सिंह के सामने आँखबन्द कर लेट गये और प्रभु का ध्यान करते हुए णमोकार मंत्र पढ़ने लगे। जब बहुत देर हो गई किन्तु सिंह ने इनका कुछ भी नहीं बिगाड़ा। कहाँ तो यह सोच रहे थे कि जीवन का अन्तिम क्षण है और कहाँ काल के मुँह में जाकर भी सुरक्षित ही रह आये तब आँख खोलकर क्या देखते हैं कि सिंह चुपचाप रोटिर्या और मिष्ठान खा रहा है, यह थी अहिंसा की अपूर्व शक्ति, जिसके द्वारा खूंखार भूखा सिंह भी अहिंसक बन गया। राजा तो यह सुनकर बड़े प्रभावित हुए।

Share:

Leave a reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *