Short Stories

अभयदान की प्रभाव

अनंगसरा को अजगर सर्प निगल रहा था, कि उसके पिता चक्रवर्ती त्रिभुवनानंद ने यह देखकर धनुष बाण से अजगर सर्प को मार डालना चाहा, किन्तु अनंगसरा ने पिता को समझाया। “पिता जी! इस नश्वर शरीर की रक्षा को आप एक पंचेन्द्रिय प्राणी की क्यों हत्या कर रहे हैं? आखिर एक दिन तो मरना ही है, मुझसे मोह छोड़कर इसे अभयदान दीजिए।”
आखिर अजगर अनंगसरा को निगल गया। अगले जन्म मे अनंगसरा का जीव राजकुमारी विशल्या हुई जिसके स्नान के जल से ही सारे रोग नष्ट हो जाते थे।

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