Short Stories

आत्मज्ञानी का वास-एकांत में

राजा जनक को उस समय के सबसे बड़े आत्मज्ञानी मुनि का पता चला। उनकी तलाश मे सब ओर दूत दौड़ाये गये। बहुत दोड़ धूप करने पर भी कुछ पता न चला तो वे निराश वापस लौट आये। राजा ने सब दूतों से यात्रा मे खोज के समाचार पूछे। वे सभी बड़े नगरों में घूमते और ढूँढ़ते फिरे थे। जनक हँसे और बोले- “ब्रह्मवेत्ता एकांत या वन प्रदेश में रहते हैं। बड़े नगरों में विलासी और संग्रहशील रहते हैं।” वे दुबारा गये और एक छोटे से वन में दिगम्बर संत को ढूढ निकाला।

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