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और यह पुरुषार्थ !

भरत चक्रवर्ती के 923 पुत्र निगोद-गति से आए थे। पूर्व संस्कार न होने से बोल नहीं पाते थे। वे चक्रवर्ती के साथ भगवान आदिनाथ् के समवसरण में पहुंचे। भरत ने भगवान से पुछा – भगवन! ये सब पुत्र सभी पुत्र बोलते क्यों नहीं। दिव्यध्वनि खिरी – ये पूर्व संस्कार वश नहीं बोल रहे हैं किन्तु अभी-अभी अंतिम बार बालेंगें। वे सभी पुत्र बोले प्रभु आपकी साक्षी में दीक्षा ले रहा हूँ और दीक्षित हो तपस्या करके मोक्ष चले गये।

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