Daily Archives: October 3, 2013

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पर पीड़ा सम पाप नहीं

बादशाह जहाँगीर ने पं. बनारसीदास की अहिंसा और सत्यवादी होने की बड़ी प्रशंसा सुनी थी। उन्होंने एक दिन ...
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जो बिन ज्ञान क्रिया अवगाहें

राजा को अपना बाग बहुत प्रिय था। उसने परदेश जाते समय राजकुमार को बाग की देख -रेख सोंप ...
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क्या ऐसा समन्वय चाहते हैं?

शकल सूरत से सभ्य लगने वाले बदमाश रमेश ने सज्जन व्यक्ति सुरेश से १॰ रुपये का नोट छीन ...
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पूज्य- शरीर या गुण

एक बार एक द्वेषी मनुष्य ने अपने शिष्यों से कहा- “ये जैन मुनि कितने गन्दें रहते हैं। कभी ...
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अमृत को विष न बनाइये

मनुष्य को चाहिये कि वह धर्म को दंभ, घृणा, विवाद और खून खराबी का कारण न बनावें। जो ...
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मेहमान को वापस भेजने गये थे।

एक सत्य घटना है। एक धर्म प्रेमी सज्जन जिनेन्द्र भक्ति और स्वाध्याय में जाया करते थे, कभी भी ...
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अपने बिन सब सूना

सीता रावण के यहाँ कैद थी। उसे राजमहिषी (पट्टरानी) बनाने का प्रलोभन दिया जा रहा था। मिष्ठान, भोजन ...
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दो हाथ खाली हाथ थे।

सिकन्दर की मृत्यु के पश्चात उसके जनाजे़ के साथ उसकी अटूट सम्पति, रत्न और स्वर्ण से लदी हुईं ...
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धर्म कार्य में विघ्न डालना महापाप है

रावण शांतिनाथ मंदिर में बैठकर विद्याएँ सिद्ध कर रहा था। यह सुनकर हनुमान ने राम से कहा-यदि रावण ...
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करुणा मानवता का चिन्ह है

जब जर्मनी के सम्राट फ्रेडरिक के बुलाने पर भी नौकर नहीं आया तो वे नौकर के कमरे में ...