Short Stories

भौतिक जीवन कामना के छिद्र

एक सज्जन ने पूछा – भगवान की पूजा करके भी मेरे संकट दूर क्यों नहीं होते? मैंने कहा – विद्यार्थी अवस्था में एक बार कुछ मित्रों के साथ मैं एक बगीचे में गया था। गर्मी के दिन थे, सबको प्यास लग रही थी। कुएँ पर एक बाल्टी पड़ी थी, उसे कुएँ में डाल दिया उसे जब खींचा तो बाल्टी खाली। आश्चर्य का ठिकाना न रहा सब लोग हंस पड़े। देखा तो बाल्टी में छेद ही छेद थे। मानो हमारा मन भी इसी बाल्टी की तरह है, जिसमें संसारी कामनाओं के अनन्त छेद हो रहे हैं। दुख संकट दूर कैसे हों?

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